हरिद्वार, प्रतिनिधि : विश्व
का सबसे बड़ा
5210 किलोग्राम वजनी पारद
ध्यान लिंगम महाशिवरात्रि के
पावन अवसर पर
हरिद्वार में विधिवत
पूजन के साथ
स्थापित किया गया।
इस भव्य पारद
शिवलिंग का निर्माण
गिरनार के ध्यान
गुरु रघुनाथ येमूल
गुरुजी ने वर्षों
की साधना, अनुसंधान और
अथक परिश्रम के
बाद किया है।
5210 किलोग्राम वजन और
अद्वितीय आकार के
कारण इस पारद
ध्यान लिंगम को
India World Record तथा
Asia World Record से
सम्मानित किया गया
है। गिनीज बुक
ऑफ रिकॉर्ड में
शामिल करने की
प्रक्रिया भी जारी
है। इसे विश्व
का सबसे बड़ा
पारद (Mercury) शिवलिंग माना
गया है।
ध्यान
गुरु रघुनाथ गुरुजी
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर
ध्यान और हीलिंग
के क्षेत्र में
कार्यरत हैं। गिरनार
में लगातार 12 वर्षों
की कठोर साधना
के पश्चात उन्होंने योग,
ध्यान, हीलिंग और
हस्तरेखा अध्ययन में
कार्य प्रारंभ किया।
अध्यात्म में विज्ञान
की खोज के
अपने संकल्प के
तहत नाथ योगी
परंपरा और प्राचीन
रसायन शास्त्र के
सिद्धांतों पर आधारित
इस पारद ध्यान
लिंगम के निर्माण
का नेतृत्व उन्होंने किया।
यह
दिव्य पारद ध्यान
लिंगम हरिद्वार–दिल्ली
राष्ट्रीय राजमार्ग पर
भादराबाद टोल प्लाजा
के समीप स्थित
शिर्डी साई बाबा
मंदिर में स्थापित
किया गया है।
वर्तमान में यह
श्री साई शिव
गंगा धाम, हरिद्वार में
श्रद्धालुओं के दर्शन
हेतु उपलब्ध है।
महाशिवरात्रि के अवसर
पर विशेष वैदिक
पूजन और अनुष्ठान संपन्न
हुए।
इस
महत्त्वपूर्ण परियोजना में
श्री राजीव बंसल
(ट्रस्टी – श्री शिर्डी
साई समर्थ ट्रस्ट,
हरिद्वार) का विशेष
सहयोग रहा। साथ
ही अनंत तावकेले
(आईजी, उत्तराखंड), शंकर
जीवाल (पूर्व डीजीपी,
तमिलनाडु), श्रीमती ममता
जीवाल, श्री मनोज
गोहाड़ (अतिरिक्त कलेक्टर),
अमित अग्रवाल (सीईओ,
DICCAI) तथा प्रदीप बत्रा
(विधायक, रुड़की) सहित
अनेक गणमान्य व्यक्तियों की
उपस्थिति और सहयोग
प्राप्त हुआ।
रघुनाथ
गुरुजी ने बताया
कि परम पूज्य
पीर योगी महंत
सोमनाथ बाप्पू और
पद्मभूषण डॉ. विजय
भटकर के विशेष
आशीर्वाद से यह
कार्य पूर्ण हो
सका।
ध्यान
गुरु रघुनाथ येमूल
गुरुजी के मार्गदर्शन में
निर्मित यह पारद
ध्यान लिंगम भविष्य
में ध्यान, आध्यात्मिक अनुसंधान और
सकारात्मक ऊर्जा का
वैश्विक केंद्र बनेगा,
ऐसा विश्वास व्यक्त
किया गया।

