मारवाड़ महासम्मेलन: रामदेवरा में सर्व समाज का अनूठा एकता संगम, जल कलश से लिया जातिवाद के खात्मे का संकल्प

 

जैसलमेर/रामदेवरा: जैसलमेर के पवित्र तीर्थ
स्थल रामदेवरा में रविवार को सामाजिक एकता मंच के तत्वावधान में ऐतिहासिक ‘मारवाड़
महासम्मेलन’ का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता इसका ऐतिहासिक
‘जल समागम’ रहा, जिसमें सभी जातियों और वर्गों के लोगों ने अपने-अपने घरों से लाए जल
को एक ही ‘सर्वोदय कलश’ में प्रवाहित कर जातिवाद के समूल नाश की सौगंध खाई

मारवाड़ की धरती पर यह संभवतः
पहला ऐसा अवसर था जब बिना जाति या धर्म के नाम के इतनी विशाल संख्या में लोग जुटे और
समाज के सार्थक विषयों पर गहन मंथन हुआ। सम्मेलन का मुख्य फोकस तीन प्रमुख बिंदुओं
पर केंद्रित रहा— बेरोजगारी का शमन, जातिवाद का उन्मूलन और पर्यावरण संरक्षण।

ऐतिहासिक क्षण: ‘जल समागम’
और ‘सर्वोदय कलश’

दोपहर करीब एक बजे इस कार्यक्रम
का सबसे भावुक और ऐतिहासिक क्षण ‘जल समागम’ देखने को मिला । जाति-पाति के भेदों को
मिटाते हुए, विभिन्न जातियों और समुदायों के लोग अपने साथ जल लेकर आए थे । इस सभी जल
को एकता और समरसता के प्रतीक स्वरूप एक ही कलश में प्रवाहित किया गया, जिसे ‘सर्वोदय
कलश’ नाम दिया गया ।

बेरोजगारी, शिक्षा और पर्यावरण
पर उद्योगपति मेघराज सिंह रॉयल का जोर:

कार्यक्रम को सम्बोधित करते
हुए प्रख्यात उद्योगपति और यूनाइटेडग्लोबल पीस फाउण्डेशन के चेयरमैन मेघराज सिंह रॉयल
ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में सबसे बड़ी समस्या बेरोजगारी है। उन्होंने कहा कि मारवाड़
के 90-90 प्रतिशत अंक लाने वाले मेधावी बच्चे संसाधनों के अभाव में पीछे रह जाते हैं।
फाउंडेशन ऐसे बच्चों को उच्च शिक्षा और प्रशासनिक सेवाओं (आईएएस, आईपीएस) की तैयारी
करवा रहा है, जिससे भविष्य में शासन-प्रशासन में योग्य लोग पहुंचें और प्रदेश की तस्वीर
बदले।

उन्होंने राजस्थान में अपार
सौर ऊर्जा की संभावनाओं का जिक्र करते हुए सुझाव दिया कि बेरोजगार युवाओं को बंजर भूमि
देकर सौर ऊर्जा उत्पादन से जोड़ा जाए, जिससे करोड़ों की आय और लाखों रोजगार सृजित हो
सकते हैं। पर्यटन को भी उन्होंने रोजगार का बहुत बड़ा साधन बताया। उन्होंने पांच प्रमुख
बिंदुओं पर बात की।

1. बेरोजगारी का समाधान और
सौर ऊर्जा मॉडल:

अपने कीनोट सम्बोधन में रॉयल
ने स्पष्ट किया कि मारवाड़ के पास सूरज के रूप में असीमित संपदा है। उन्होंने एक ठोस
आर्थिक मॉडल पेश करते हुए कहा कि यदि राजस्थान की मात्र 10% बंजर ज़मीन बेरोजगारों
और किसानों को दे दी जाए, तो 4 एकड़ ज़मीन में 1 मेगावाट बिजली बनती है जिससे साल के
50 लाख रुपये कमाए जा सकते हैं। इस मॉडल से मारवाड़ के 45 लाख लोगों को सीधा रोजगार
और करोड़ों की आय हो सकती है। अप्रत्यक्ष रोजगार की तो करोड़ों में संख्या जाएगी।

2. पर्यटन और पारंपरिक कलाओं
का पुनरुद्धार:

उन्होंने 1986 में डॉ. ललित
के. पंवार के साथ मिलकर जैसलमेर को विश्व पर्यटन के नक्शे पर लाने के अपने सफर को साझा
किया। उन्होंने बताया कि कैसे ऊंटों के तबेले से शुरुआत कर उन्होंने होटल उद्योग खड़ा
किया, जिससे केवल इमारतें नहीं बनीं बल्कि स्थानीय मांगणियार गायकों, कारीगरों और नर्तकों
को एक वैश्विक मंच और स्थायी रोजगार मिला।

3. जातिवाद की वैज्ञानिक
और ऐतिहासिक व्याख्या:

रॉयल ने जातिवाद पर तीखा
प्रहार करते हुए कहा कि प्राचीन काल में ‘जाति’ जन्म से नहीं बल्कि हुनर और काम (जैसे
कुम्हार, नाई, माली) से पहचानी जाती थी। यह सिर्फ एक कार्यशैली थी, जिसे बाद में अंग्रेजों
और राजनेताओं ने अपने स्वार्थ के लिए ‘जातिवाद’ की बीमारी में बदल दिया। उन्होंने कहा
कि जातिवाद समंदर के खारे पानी की तरह है, इसे छोड़ें और मेहनत रूपी तकनीक से मीठा
पानी बनाएं।

4. तकनीक (एआई) की सुनामी
और ईस्ट इंडिया कंपनी 2.0 से चेतावनी:

उन्होंने युवाओं को चेताया
कि आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जैसी तकनीक बड़े स्तर पर रोजगार
छीनेगी। इसलिए हाथ के हुनर और पारंपरिक कलाओं को बचाना जरूरी है। उन्होंने बड़ी कॉर्पोरेट
रिटेल चेन्स को नई “ईस्ट इंडिया कंपनी” करार देते हुए लोगों से अपील की कि
वे ऑनलाइन विदेशी कंपनियों से सामान मंगाना बंद करें और स्थानीय व्यापारियों व भाइयों
का समर्थन करें, अन्यथा आने वाली पीढ़ियों का 70% हिस्सा बेरोजगार हो जाएगा।

5. राजनीति नहीं, लोकनीति

मेघराज सिंह रॉयल ने स्पष्ट
किया कि इस मंच का उद्देश्य कोई राजनीतिक पार्टी बनाना नहीं है। हालांकि, उन्होंने
जनता से आह्वान किया कि वे विधानसभा और लोकसभा में अनपढ़ नेताओं की बजाय पढ़े-लिखे,
सूट-टाई पहनने वाले योग्य युवाओं को भेजें जो तकनीक और अर्थव्यवस्था को समझते हों।

इंसानियत और समरसता का विजन
– डॉ. विक्रांत सिंह तोमर:

जाने-माने मोटिवेटर डॉ. विक्रांत
सिंह तोमर ने ‘यूनाइटेड ग्लोबल पीस फाउंडेशन’ के नाम की सार्थकता स्पष्ट की। ‘यूनाइटेड’
शब्द की व्याख्या करते हुए उन्होंने भारत की उस महान संस्कृति को याद किया जिसने पारसी,
यूनानी, ईसाई और इस्लाम सभी को खुले दिल से गले लगाया। उन्होंने जंगल में लगी आग में
फंसे एक अंधे और एक लंगड़े व्यक्ति की कहानी के माध्यम से समझाया कि संकट के समय (जैसे
आज समाज में वैमनस्य की आग लगी है) हमें एक-दूसरे का सहारा बनना पड़ेगा। ‘ग्लोबल’ के
तहत उन्होंने जांभोजी महाराज के पर्यावरण प्रेम और ‘पीस’ के तहत माता करणी की भक्ति
को कर्म में ढालकर समाज सेवा करने का सन्देश दिया। उन्होंने बताया कि फाउंडेशन द्वारा
मेधावी बच्चों को स्कॉलरशिप दी जा रही है और रोजगार के लिए ऑस्ट्रेलिया तक के रास्ते
तलाशे जा रहे हैं।

मारवाड़ की सांस्कृतिक विरासत
और भाईचारा – अरविंद सिंह भाटी:

जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय,
जोधपुर के छात्रसंघ अध्यक्ष अरविंद सिंह भाटी ने कहा कि आज का यह महासम्मेलन मारवाड़
की ‘अपनायत’ और प्रेम को बचाने का साझा प्रयास है। उन्होंने ऐतिहासिक उदाहरण देते हुए
बताया कि प्रभु राम ने माता शबरी के जूठे बेर खाए और महर्षि वाल्मीकि व महात्मा विदुर
को समाज में जो सर्वोच्च स्थान मिला, वह साबित करता है कि कर्म ही प्रधान है। उन्होंने
मारवाड़ के उस सामाजिक ताने-बाने को याद दिलाया जिसमें जन्म से लेकर मृत्यु तक हर मांगलिक
और धार्मिक कार्य में नाई, सुथार, मंगणियार आदि सभी जातियों की समान व सम्मानजनक भागीदारी
होती है। भाटी ने युवाओं को सोशल मीडिया के ‘डिजिटल कोकीन’ से बचकर सही को सही कहने
की हिम्मत रखने को कहा।

समस्याओं के साथ समाधान भी
– मुकेश मेघवाल:

यूजीपीएफ के मैनेजर मुकेश
मेघवाल ने भावुक उद्बोधन देते हुए बताया कि इस एकता मंच को तैयार करने के लिए उन्होंने
तीन महीने तक मारवाड़ के गांव-ढाणी का दौरा कर 36 कौमों को आमंत्रित किया। उन्होंने
कहा कि श्री मेघराज सिंह रॉयल समाज की सिर्फ समस्याएं नहीं बताते, बल्कि उनके ठोस समाधान
भी लागू कर रहे हैं। सूर्यगढ़ में 100 युवाओं को 25,000 रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड के
साथ होटल मैनेजमेंट की ट्रेनिंग, गरीब बेटियों की शादी और 700 बच्चों की फाउंडेशन के
जरिए निशुल्क शिक्षा इसके जीवंत उदाहरण हैं। उन्होंने बाबा रामदेव की धरती से सभी उपस्थित
लोगों को सामाजिक एकता और भाईचारे को मजबूत करने की सौगंध दिलाई।

पुरुषार्थ ही है असली प्रतिष्ठा
– संत ओमदास महाराज:

संत ओमदास महाराज ने कहा
कि इंसान की प्रतिष्ठा उसके पैसे या पद से नहीं, बल्कि उसके पुरुषार्थ से होती है।
उन्होंने श्री मेघराज सिंह जी की निस्वार्थ सेवा भावना की प्रशंसा करते हुए कहा कि
वे बाहर से ही नहीं, अंदर से भी ‘रॉयल’ हैं। संत जी ने पुष्कर, पिछोला और मेहरानगढ़
के ऐतिहासिक निर्माण में जल और समाज के लिए मेघवाल समाज के पूर्वजों द्वारा दी गई कुर्बानियों
(जैसे राजा राम मेघवाल, मनाना जी आदि का बलिदान) को याद किया। उन्होंने सभी से नफरत
की दीवारें गिराकर एक ही माला के मोतियों की तरह पिरोए जाने का आह्वान किया।

महापुरुषों का उदाहरण और
युवा जोश – मोती सिंह जोधा:

युवा नेता मोती सिंह जोधा
ने अपने जोशीले सम्बोधन में कहा कि छुआछूत और ऊंच-नीच हमारी मूल संस्कृति का हिस्सा
कभी थे ही नहीं। भगवान राम के राजतिलक के मुख्य अतिथि केवट थे। पाबूजी महाराज के साथ
भील समाज के वीर थे और महाराणा प्रताप की सेना में भील, गाडोलिया लोहार और हकीम खान
सूर मजबूती से कंधे से कंधा मिलाकर खड़े थे। उन्होंने कहा कि जो मंच शिक्षा, रोजगार
और सर्व समाज को साथ लेकर चलने की बात करे, हमें उस मंच और ऐसे कर्मवीरों के साथ पूरी
ताकत से खड़ा होना चाहिए।

विरासत, संस्कृति और लोक
कला का संगम

कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत
उमराव सिंह जोधा और रईस अहमद मलिक द्वारा की गई। यहां ‘मारवाड़ डॉक्यूमेंट्री’ और
‘सोच डॉक्यूमेंट्री’ का प्रभावशाली प्रदर्शन किया गया। युवा 
श्री लोकेंद्र सिंह भाटी
ने मारवाड़ के गौरवशाली इतिहास पर अपना वक्तव्य दिया । वहीं, माधो सिंह ने ‘विरासत
और संस्कृति’ पर गहन चर्चा की, जिसके बाद बाबू खान जीनावती ने अपनी शानदार ‘लोक कविता’
की प्रस्तुति से उपस्थित लोगों में नई ऊर्जा का संचार कर दिया ।

नारी शक्ति का प्रतिनिधित्व
करते हुए श्रीमती आशा मेघवंशी ने ‘सामाजिक एकीकरण में महिलाओं की भूमिका’ के महत्व
को समझाया ।

 

शिक्षा का महत्व: राजस्थान
में विश्वविद्यालयों के कुलपति रहे शिक्षाविद् प्रो. अमरीका सिंह ने समाज के उत्थान
में ‘शिक्षा की भूमिका’ को रेखांकित किया ।

पूर्व आईएएस ललित के. पंवार
व प्रो. शकील परवेज का सन्देश

सम्मेलन के दौरान पूर्व आईएएस
एवं मारवाड़ के लाल ललित के. पंवार तथा मारवाड़ मुस्लिम वेलफेयर एजुकेशनल सोसायटी के
सीईओ और अकादमिक डायरेक्टर प्रो. शकील परवेज ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से
अपना विशेष संदेश दिया। दोनों ही वक्ताओं ने सामाजिक एकता मंच और यूनाइटेड ग्लोबल पीस
फाउंडेशन द्वारा उठाए गए तीन प्रमुख मुद्दों— बेरोजगारी का शमन, जातिवाद का उन्मूलन
और पर्यावरण संरक्षण— की भूरि-भूरि प्रशंसा की और बताया कि फाउंडेशन इन दिशाओं में
बहुत ही बेहतरीन व जमीनी काम कर रहा है।

एकात्म मानववाद से सर्वोदय
की ओर

सभी धर्मों और समुदायों के
लोगों ने मंच पर रखे कलश में एक साथ जल प्रवाहित कर एकता और समरसता की अद्भुत मिसाल
कायम की। बाबा रामदेव की इस पावन धरा से उठे इस महासम्मेलन के शंखनाद ने स्पष्ट कर
दिया है कि रोजगार, शिक्षा और भाईचारे के आधार पर मारवाड़ अब एक नई और सकारात्मक दिशा
में कदम बढ़ा चुका है। डॉ. विक्रांत सिंह तोमर ने बताया कि यह कलश एकात्म मानववाद से
सर्वोदय की ओर बढ़ने का प्रतीक है। महासम्मेलन ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि मारवाड़
का सर्व समाज एकजुट होकर शिक्षा, रोजगार और पर्यावरण पर ध्यान केंद्रित करे, तो राजस्थान
से बेरोजगारी और जातिवाद का कलंक हमेशा के लिए मिटाया जा सकता है। इस सफल महासम्मेलन
का समापन दुर्जन सिंह द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

पुस्तिका ने किया ध्यान आकर्षित

आयोजकों की ओर से यहां बांटी
गई पुस्तिका ने हर किसी का ध्यान आकर्षित किया। इसमें सोलर कंपनियों की यहां धमक और
चमक के पीछे की सच्चाई पर एक पुस्तिका वितरित की गई। उसमें दो प्रोजेक्ट बताए गए, जिसमें
बेरोजगारी उन्मूलन और पर्यावरण संरक्षण का खाका खींचा गया था। इस पुस्तिका को लेकर
हर कोई उत्सुक नजर आया।